शहर से दूर एक बहुत ही घना और हरा-भरा जंगल था। उस घने जंगल में कई तरह के जानवर रहते थे। उस जंगल में एक खरगोश और एक बंदर भी रहते थे। वो अगल-बगल रहने के कारण दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी। दोनों पूरा दिन एक दूसरे के साथ बिताया करते थे। कई बार खरगोश को पेड़ पर चढ़ना होता तो बंदर उसे अपनी पीठ पर बैठा के एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूद कर ले जाता, खरगोश को बहुत मजा आता था। तो जब खरगोश गाजर खाता तो बंदर के लिए भी गाजर ले के आता था और दोनों साथ मिलकर खाते। इस प्रकार दोनों मित्र साथ-साथ रहते थे।
एक बार सुबह खरगोश और बंदर जंगल में घूम रहे थे। घूमते-घूमते दोनों झील के किनारे पहुँचे, वहाँ दोनों ने पानी पिया और सोचा की कुछ करते है। वहा दोनों ने लुका-छिपी खेलने का फैसला किया। अब सवाल ये था की छुपेगा कौन और ढूंढेगा कौन? फिर खरगोश ने बंदर से कहा, " तुम छिप जाओ, मैं तुम्हें खोजने आता हूं। " बंदर इससे सहमत होगया और कहा, "ठीक है, में छिप जाता हूँ,तुम आकर मुझे ढूंढो।"
जैसे ही खरगोश ने अपनी आंखें बंद कीं, बंदर दौड़कर छिप गया, बंदर एक पेड़ पर चढ़ गया ताकि खरगोश उसे ढूंढ न सके। बंदर उसकी चतुराई से खुश हुआ। खरगोश बंदर को ढूँढने लगा जब नही मिला तो उसने सोचा की बंदर नक्की लगता है पेड़ पर चढ़ गया है।
जैसे ही खरगोश बंदर को खोजने के लिए इधर-उधर घूम रहा था, उसने देखा कि जंगल के सभी जानवर जंगल के दूसरी तरफ भाग रहे हैं। खरगोश ने दौड़ते हुए लोमड़ी से पूछा, "अरे भाई, सब क्यों भाग रहे हैं?" लोमड़ी ने हाँफते हाँफते कहा, "जंगल में शिकारी आया है, भाग जाओ! "
खरगोश डर गया, शिकारी से दूर भागने की बजाय उसे बंदर की चिंता होने लगी क्यों की बंदर उसका दोस्त था। वह बंदर की तलाश करने लगा। अगर बंदर शिकारी के चंगुल में आ गया तो उसका क्या होगा? वह बंदर की तलाश करने लगा।
खरगोश ने बंदर को आवाज लगाई, "अरे बंदर, दोस्त कहाँ हो तुम? जल्दी आ जाओ, हमारी जान को खतरा है। जंगल में शिकारी आ गए है। " और वह फिरसे बंदर की तलाश करने लगा और दूर चला गया।
उधर बन्दर ने भी सभी जानवरों को भागते देखा, उसे भी खरगोश की चिंता हुई। वह जल्दी से तालाब की ओर गया लेकिन खरगोश उसे ढूंढ़ता हुआ दूर निकल चुका था। बंदर चिल्ला रहा था दोस्त तुम कहा हो?
खरगोश बंदर को ढूंढ रहा था तभी शिकारी की नजर उस पर पड़ी, वह जाल बिछाकर खरगोश को फंसाने की कोशिश कर रहा था, बंदर ने उसे दूर से ही देख लिया, वह खरगोश को बचाने के लिए धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ा। और कहने लगा, "अरे, अगर मैंने जल्द ही कुछ नहीं किया, तो मेरा दोस्त पकड़ा जाएगा।"
बंदर शिकारी द्वारा देखे बिना पेड़ पर चढ़ गया और खरगोश था उसी दिशा में आगे बढ़ने लगा, वह अपने दोस्त को बचाने के लिए कुछ भी करना चाहता था, वह जितनी तेजी से हो सके पेड़ पर कूदने लगा। भगवान मेरे दोस्त को कुछ ना हो।
खरगोश शिकारी के जाल में फंसने ही वाला था कि बंदर समय रहते वहां पहुंच गया और कूदकर खरगोश को पकड़ लिया। शिकारी यह सब देख रहा था, लेकिन बंदर ने सब कुछ इतनी तेजी में किया वह किसी को पकड़ न सका। खरगोश ने बंदर से कहा, "दोस्त तुम कहाँ थे, मैं तुम्हें ढूंढ रहा था! " और बंदर ने भी खरगोश से यही कहा।
खरगोश और बंदर एक दूसरे के गले लगे और एक दूसरे का शुक्रियादा करने लगे।
दोनों दोस्तों ने मुसीबत के समय अपनी जान बचाने के बजाय अपने दोस्त को ढूंढ़ने और उसे बचाने की सोची। यही उनकी सच्ची दोस्ती को दर्शाता है।

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